हिंदू धर्म में हर एक माह का विशेष महत्व होता है। अभी माघ महीना चल रहा है। लेकिन जल्द ही हिंदू पंचांग का आखिरी यानी 12वां महीना फाल्गुन शुरू होगा। इस माह को फागुन का महीना भी कहते हैं। इस माह में हिंदू धर्म के कई महत्वपूर्ण और बड़े त्योहार पड़ते हैं जैसे- महाशिवरात्रि, होली आदि। इसलिए यह माह शिव जी की पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास माना जाता है। वहीं,राधा-कृष्ण का प्रिय त्योहार होली भी इसी माह मनाया जाता है। साथ ही यह माह दान-पुण्य के कार्यों के लिए भी शुभ माना जाता है।
व्रत-त्योहार के अलावा इस माह में शादी-विवाह, मुंडन, गृह-प्रवेश समेत मांगलिक कार्यों के आयोजन का भी शुभ समय होता है। इस महीने से ही गर्मी के मौसम की शुरुआत होती है। ऐसे में आइए जानते हैं माघ महीना कब से शुरू हो रहा है और इस माह में क्या करना चाहिए और क्या नहीं।
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास माघ पूर्णिमा के अगले दिन से शुरू होता है। साल 2026 में हिंदू कैलेंडर का आखिरी महीना फाल्गुन 2 फरवरी 2026 से शुरू हो रहा है और इसका समापतन 3 मार्च 2026 को होगा। इस महीने की पूर्णिमा को फाल्गुनी नक्षत्र होने के कारण इसका नाम फाल्गुन पड़ा है।
फाल्गुन माह में में आप भगवान श्री कृष्ण की पूजा कर सकते हैं। इनकी पूजा करने से संतान की प्राप्ति, वैवाहिक जीवन का सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा महाशिवरात्रि पर महादेव की आराधना कर सकते हैं। मान्यता है कि चंद्रमा की उत्पत्ति फाल्गुन मास में हुई थी, इसी कारण मानसिक शांति और मन की स्थिरता के लिए इस माह चंद्रदेव की आराधना की जाती है।
– फाल्गुन माह में मांगलिक कार्य शुरू कर सकते हैं। इस माह में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नए बिजनेस की शुरुआत हो जाती है।
– इस महीने भगवान श्रीकृष्ण और महादेव को गुलाल चढ़ाना चाहिए।
– इस माह गाय की सेवा करना बेहद शुभ फलदायी माना जाता है।
– इस माह में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और श्रीकृष्ण के भजन-कीर्तन करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस माह में अन्न, वस्त्र, धन और जरूरतमंदों को दी गई सहायता से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती
– हालांकि इस में मांस, मदिरा और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।
– किसी के भी प्रति अपने मन में नकारात्मक विचारों को नहीं लाना चाहिए।
– पितरों की कृपा पाने के लिए फाल्गुन माह में तर्पण और विशेष दान करना भी शुभ माना गया है।
5 फरवरी – संकष्टी चतुर्थी
13 फरवरी – विजया एकादशी, कुम्भ संक्रांति
14 फरवरी – प्रदोष व्रत (कृष्ण)
15 फरवरी – महाशिवरात्रि, मासिक शिवरात्रि
17 फरवरी – फाल्गुन अमावस्या
24 फरवरी – होलाष्टक शुरू
27 फरवरी – आमलकी एकादशी
28 फरवरी – प्रदोष व्रत (शुक्ल)
डिस्क्लेमरः इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

