पेट्रोल संकट के बीच अब इलाज भी महंगा, दवाइयों की कीमतों में उछाल के संकेत

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खाड़ी में छिड़े युद्ध का असर इलाज पर भी आने का खतरा है। सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाइयां महंगी हो सकती हैं। इसके संकेत आने शुरू हो गए हैं। अभी पैरासिटामोल के दाम आंशिक रूप से बढ़ गए हैं। आने वाले समय में दूसरी दवाइयों पर भी असर पड़ सकता है। दरअसल पेट्रो उत्पादों की किल्लत से दवाइयों के निर्माण के लिए कच्चा माल मिलने में दिक्कतें होनी शुरू हो गई हैं। अभी निर्माता कंपनियां इससे जूझ रही हैं। पुराने स्टाक के भरोसे सब कुछ चल रहा है। लेकिन आगे के आर्डर के लिए कच्चा माल (रा-मेटेरियल) मिलना मुश्किल हो रहा है।

यह माल चीन के अलावा खाड़ी देशों से भी आता है। खाड़ी देशों से कई तरह के जड़ी-बूटियां आती हैं जिनका प्रयोग दवाइयां बनाने में किया जाता है। इनकी सप्लाई रुक गई है। जबकि चीन से दवाइयां बनाने के लिए ड्रग्स का पावडर आता है। इसकी सप्लाई भी बाधित होने लगी है। फार्मा कंपनियों से लेकर थोक और फुटकर विक्रेता अभी पुराने स्टाक से काम चला रहे हैं। नए आर्डर प्रभावित हैं।

फुव्वारा दवा बाजार में पैरासिटामोल के दामों में बढ़ोत्तरी हो गई है। इसके 500 रुपए का डब्बा अब 520 रुपए में बिक रहा है। यह दवा 12 महीने सबसे ज्यादा बिकती है। आने वाले दिनों में सर्वाधिक बिकने वाली दवाइयों के दाम बढ़ सकते हैं। इनमें रोजाना इस्तेमाल की दवाएं जैसे डायबिटीज, हाई बीपी, थायराइड, अर्थराइटिस की दवाएं महंगी हो सकती हैं।

पैट्रो उत्पादों से प्लास्टिक के दाने बनाए जाते हैं। इन्हीं से सिरिंज, कैन्युला, ड्रिप सैट आदि बनाए जाते हैं। सिरिंज के पैकेट के दाम 20 से 30 रुपए बढ़ चुके हैं। कैन्युला के दाम भी 3-4 रुपए से बढ़कर 7 से 8 रुपए के बीच चल रहे हैं। इनमें और बढ़ोत्तरी होने के आसार हैं। इसी तरह सर्जरी में काम आने वाले प्लास्टिक के सामानों में भी बढ़ोत्तरी हो चुकी है।

आम तौर पर रिटेलर (थोक विक्रेता) के पास तीन दिन का स्टाक रहता है। इसी तरह थोक विक्रेता के पास 15 दिनों का स्टाक होता है। डिस्ट्रीब्यूटर के पास 3 और मैन्यूफैक्चर के पास 4 माह का स्टाक रहता है। इन दिनों मैन्यूफैक्चर के स्तर पर आर्डर पेंडिंग हो गए हैं। दो आर्डर एडवांस में भेजे गए हैं लेकिन किसी की सप्लाई का कोई जवाब नहीं आया है।

मैन्यूफैक्चर्स के पास हमारे दो-दो आर्डर पेंडिंग हो गए हैं। कोई जवाब नहीं आया है। इसलिए बाजार में पेनिक है। कुछ लोग दाम बढ़ाकर बेच रहे हैं। सब कुछ स्टाक पर निर्भर करता है। स्टाक खत्म हुआ और नया माल नहीं आया तब दिक्कत होने के आसार हैं। अनूप बंसल, अध्यक्ष आगरा फार्मा एसोसिएशन

 

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